प्रियंका गांधी के असम दौरे के बाद दिल्ली में बड़ी बैठक, संगठन और रणनीति पर मंथन

 

नई दिल्ली/गुवाहाटी। कांग्रेस महासचिव और असम की स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष Priyanka Gandhi Vadra असम के अहम दौरे के बाद दिल्ली लौट आई हैं। राजधानी में उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें संगठन की स्थिति, संभावित चुनावी रणनीति और टिकट वितरण को लेकर व्यापक चर्चा हुई।

यह शायद पहला अवसर है जब किसी प्रदेश की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष के दौरे को इतना राजनीतिक महत्व दिया जा रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि इस पूरी कवायद का नेतृत्व स्वयं प्रियंका गांधी कर रही हैं।

स्क्रीनिंग कमेटी और पर्यवेक्षक में बड़े नाम

असम की स्क्रीनिंग कमेटी में कई दिग्गज नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं:

D. K. Shivakumar — कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री

Bhupesh Baghel — छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री

Imran Masood — सांसद

इन नेताओं की मौजूदगी से यह साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस असम में संगठनात्मक पुनर्गठन और उम्मीदवार चयन को लेकर बेहद गंभीर है।

 

जमीनी फीडबैक पर जोर

असम दौरे के दौरान प्रियंका गांधी ने 21 विधायकों, 3 सांसदों, जिला अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों से अलग-अलग बैठकों में मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में स्थानीय स्तर पर संगठन की स्थिति, संभावित असंतोष, टिकट की दावेदारी और विपक्ष के खिलाफ रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने नेताओं से स्पष्ट कहा है कि “जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को प्राथमिकता दी जाएगी” और टिकट वितरण में संगठनात्मक निष्ठा व जीत की संभावना को अहम मानदंड बनाया जाएगा।

बड़ी चुनौतियां भी सामने

हालांकि असम में कांग्रेस के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं:

आंतरिक असंतोष और बगावत – कई सीटों पर संभावित टिकट दावेदारों के बीच खींचतान की स्थिति है।

संगठनात्मक कमजोरी – बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

राजनीतिक प्रतिस्पर्धा – राज्य में सत्तारूढ़ दल की मजबूत पकड़ के बीच कांग्रेस को अपने जनाधार को फिर से संगठित करना होगा।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुई बैठक में इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और जल्द ही नई जिम्मेदारियों की घोषणा संभव है।

रणनीतिक संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी की सक्रियता से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया उत्साह देखने को मिल सकता है। पार्टी नेतृत्व यह संकेत देना चाहता है कि असम को हल्के में नहीं लिया जाएगा और उम्मीदवार चयन से लेकर चुनावी अभियान तक हर स्तर पर गंभीरता बरती जाएगी।

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