शिमला/मंडी। जल जीवन मिशन के फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से अब इस मामले में सीधे जवाब मांगे जा रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में जल जीवन मिशन के तहत मिले बजट का एक हिस्सा विश्राम गृहों के निर्माण में खर्च किया गया।
उठ रहे हैं ये प्रमुख सवाल
राजनीतिक विपक्ष और सामाजिक संगठनों की ओर से जयराम ठाकुर से निम्नलिखित सवाल पूछे जा रहे हैं—
क्या जल जीवन मिशन के फंड से धर्मपुर और सराज विधानसभा क्षेत्रों में 19 विश्राम गृहों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी?
यदि हां, तो क्या यह व्यय योजना की मूल गाइडलाइंस के अनुरूप था?
कुल ₹37.85 करोड़ की राशि—जिसमें ₹26.11 करोड़ धर्मपुर और ₹11.74 करोड़ सराज क्षेत्र में खर्च हुए—का प्रशासनिक औचित्य क्या था?
क्या इस संबंध में विभागीय स्वीकृति और केंद्र सरकार की अनुमति प्राप्त थी?
सराज क्षेत्र पर विशेष ध्यान
बताया जा रहा है कि जिन 7 विश्राम गृहों का निर्माण हुआ, वे सराज विधानसभा क्षेत्र में हैं, जो जयराम ठाकुर का गृह क्षेत्र है। इसी कारण विपक्ष इसे “हितों के टकराव” का मामला बताते हुए पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
भाजपा की दलील
भाजपा नेताओं का कहना है कि सभी निर्माण कार्य नियमानुसार स्वीकृत परियोजनाओं के तहत हुए और उनका उद्देश्य विभागीय गतिविधियों, निरीक्षण और विकास कार्यों को सुगम बनाना था। पार्टी का दावा है कि किसी भी प्रकार का दुरुपयोग नहीं हुआ।
आगे क्या ?
मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर प्रशासनिक जांच की मांग तक पहुंच गया है। यदि सरकार इस पर औपचारिक जांच बैठाती है, तो आने वाले दिनों में दस्तावेज और तथ्य सार्वजनिक हो सकते हैं।
फिलहाल, प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा गरमाया हुआ है और सबकी नजर जयराम ठाकुर की विस्तृत प्रतिक्रिया पर टिकी है।
