नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि यह ट्रेड डील किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस अब संसद से लेकर सड़क तक आंदोलन को धार देने जा रही है और राज्यवार किसान सम्मेलनों की शुरुआत 24 फरवरी से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करेगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली में हुई रणनीतिक बैठक में किसान सम्मेलनों की रूपरेखा तय की गई। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष शामिल हुए। कांग्रेस का कहना है कि वह इस डील के संभावित असर को लेकर किसानों के बीच जाकर जागरूकता अभियान चलाएगी।
तीन राज्यों में बड़े सम्मेलन
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पहले चरण में तीन बड़े किसान सम्मेलनों की घोषणा की है—
24 फरवरी – भोपाल (मध्य प्रदेश)
7 मार्च – यवतमाल (महाराष्ट्र)
9 मार्च – श्रीगंगानगर (राजस्थान)
भोपाल में होने वाले पहले सम्मेलन में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi शामिल होंगे। पार्टी ने अन्य किसान संगठनों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है, ताकि इस मुद्दे पर व्यापक विपक्षी एकजुटता दिखाई जा सके।
कांग्रेस का आरोप क्या है?
कांग्रेस का दावा है कि अमेरिका के साथ हुए इस व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र में आयात का दबाव बढ़ेगा, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है। पार्टी का कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारी भी इस डील से प्रभावित होंगे। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार ने समझौते की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है और न ही किसानों से व्यापक परामर्श किया गया।
संसद से सड़क तक रणनीति
कांग्रेस पहले ही संसद में इस मुद्दे को उठा चुकी है। अब पार्टी किसान संगठनों के साथ मिलकर जनसभाओं और सम्मेलनों के जरिए इसे जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि कृषि प्रधान राज्यों में इस मुद्दे पर व्यापक संवाद से सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला बड़ा संगठित अभियान है, जिसके जरिए कांग्रेस किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, अमेरिका–भारत ट्रेड डील अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है और आने वाले हफ्तों में इस पर सियासी तापमान और बढ़ने के आसार हैं।
