बरनाला से ‘मिशन 2027’ का बिगुल: खड़गे-राहुल की हुंकार, मनरेगा और ट्रेड डील पर केंद्र सरकार पर सीधा वार

बरनाला, 28 फरवरी। पंजाब की सियासत में आज बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला, जब कांग्रेस ने बरनाला की अनाज मंडी से 2027 विधानसभा चुनाव अभियान का शंखनाद किया। रैली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने मंच साझा कर केंद्र सरकार को मनरेगा और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के मुद्दे पर घेरा।

पार्टी ने इसे “मनरेगा बचाओ संग्राम” और “किसान-मजदूर रैली” का नाम दिया है, जिससे साफ है कि कांग्रेस ग्रामीण और श्रमिक वर्ग को सीधे साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

2027 की औपचारिक शुरुआत

प्रदेश प्रधान Amrinder Singh Raja Warring और पंजाब प्रभारी Bhupesh Baghel ने रैली को 2027 के चुनावी अभियान का आगाज बताया। कांग्रेस का संदेश साफ है—मालवा से शुरुआत, पूरे पंजाब में विस्तार।

पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और संगठन को एकजुट दिखाने की रणनीति इस रैली के केंद्र में रही।

मालवा बेल्ट पर निर्णायक दांव

बरनाला, मालवा क्षेत्र का अहम राजनीतिक और कृषि केंद्र है। पंजाब की 117 में से 69 सीटें इसी बेल्ट में आती हैं। आम आदमी पार्टी का यहां मजबूत आधार माना जाता है, लेकिन हालिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत ने समीकरण बदले हैं।

कांग्रेस इस रैली के जरिए किसानों-मजदूरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर मालवा में खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।

मनरेगा और किसानों के मुद्दे पर आक्रामक तेवर

रैली के केंद्र में मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया। कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा के बजट और क्रियान्वयन को कमजोर किया जा रहा है। साथ ही भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र को संभावित नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया।

राहुल गांधी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और किसानों की आय को लेकर सवाल उठाते हुए केंद्र और राज्य की AAP सरकार दोनों को कठघरे में खड़ा करने की रणनीति दिखाई। पोस्टरों में उन्हें मनरेगा मजदूर के रूप में दिखाकर प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश की गई।

गुटबाजी पर ब्रेक, एक मंच पर सभी चेहरे

लंबे समय से गुटबाजी झेल रही पंजाब कांग्रेस ने इस रैली के जरिए एकजुटता का प्रदर्शन किया। मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री Charanjit Singh Channi, वरिष्ठ नेता Sukhjinder Singh Randhawa और नेता विपक्ष Pratap Singh Bajwa समेत कई दिग्गज मौजूद रहे।

करीब 50,000 से अधिक लोगों को जुटाने की तैयारी ने इसे संगठनात्मक ताकत के प्रदर्शन में बदल दिया।

रणनीतिक संदेश

बरनाला की अनाज मंडी—जो किसान आंदोलनों का अहम केंद्र रही है—को रैली स्थल चुनकर कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह खुद को किसानों की असली हितैषी के रूप में पेश करना चाहती है।

इस शक्ति प्रदर्शन से कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि 2027 की लड़ाई की जमीन आज से तैयार हो रही है। अब देखना होगा कि यह सियासी शंखनाद मालवा और पूरे पंजाब की राजनीति में कितना असर छोड़ता है।

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