असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने उम्मीदवार चयन की परंपरागत दिल्ली-केंद्रित प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए एक नया ‘पायलट मॉडल’ लागू किया है। इस पहल की अगुवाई पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी कर रही हैं। उद्देश्य साफ है—जमीनी हकीकत के आधार पर उम्मीदवार तय करना और स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को प्राथमिकता देना।
स्क्रीनिंग कमेटी को जिलों में भेजा गया
इस मॉडल के तहत स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य—
Saptagiri Sankar Ulaka
Imran Masood
Sirivella Prasad
को सीधे जिलों में जाकर फीडबैक लेने की जिम्मेदारी दी गई है। ये सदस्य स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सिविल सोसायटी प्रतिनिधियों और पत्रकारों से मुलाकात कर संभावित उम्मीदवारों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे।
दिल्ली मॉडल से अलग, जमीनी फोकस
अब तक अधिकांश राज्यों में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया दिल्ली में बैठकर होती रही है, जहां प्रदेश इकाइयों से मिली सिफारिशों के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाता था। लेकिन इस बार असम में पार्टी ने प्रयोग के तौर पर प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत किया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक,
स्थानीय संगठन की स्वीकार्यता
उम्मीदवार की जनाधार क्षमता
सामाजिक समीकरण
क्षेत्रीय मुद्दों की समझ
इन सभी बिंदुओं पर फील्ड रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
126 सीटों की चुनौती
असम में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं। राज्य में सत्तारूढ़ दलों के मजबूत संगठन और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में ‘पायलट मॉडल’ को पार्टी की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
सफल रहा तो अन्य राज्यों में भी लागू होगा
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि यह प्रयोग असम में सकारात्मक परिणाम देता है, तो इसे अन्य चुनावी राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। पार्टी के भीतर इसे संगठनात्मक सुधार और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मॉडल दो संदेश देता है—
स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा
टिकट वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही
अब देखने वाली बात होगी कि असम में यह प्रयोग पार्टी को कितना फायदा पहुंचाता है और क्या यह मॉडल कांग्रेस की चुनावी रणनीति का स्थायी हिस्सा बन पाता है।
