रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए 16 मार्च को मतदान प्रस्तावित है। विधानसभा की वर्तमान संख्या बल को देखते हुए प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियों—कांग्रेस और बीजेपी—को एक-एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में रायपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई है और दोनों दलों में उम्मीदवारों के नामों को लेकर गहन मंथन जारी है।
कांग्रेस में नामों को लेकर गहमागहमी
कांग्रेस खेमे में इस बार राज्यसभा के लिए कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। जिन प्रमुख नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें—
भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री)
टीएस सिंह देव (पूर्व उपमुख्यमंत्री)
दीपक बैज (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)
—शामिल हैं। इन तीनों नेताओं का संगठन और सरकार में लंबा अनुभव रहा है, जिसके चलते पार्टी किसी अनुभवी चेहरे को राज्यसभा भेजने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर सकती है।
सामाजिक समीकरण भी अहम
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि कांग्रेस इस बार सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए ओबीसी या आदिवासी वर्ग से आने वाले नेता को प्राथमिकता दे सकती है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान ऐसा चेहरा चुनना चाह सकती है, जो आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से भी फायदेमंद साबित हो।
दीपक बैज आदिवासी समाज से आते हैं, जबकि भूपेश बघेल ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं टीएस सिंह देव सरगुजा क्षेत्र से एक प्रभावशाली और वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। इस लिहाज से तीनों नाम राजनीतिक और सामाजिक संतुलन के अलग-अलग आयाम पेश करते हैं।
दिल्ली दरबार की नजर
राज्यसभा चुनाव भले ही संख्या बल के आधार पर लगभग तय माने जा रहे हों, लेकिन उम्मीदवार चयन को लेकर अंतिम मुहर दिल्ली में ही लगेगी। कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीति, संसद में प्रभावी उपस्थिति और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए फैसला करेगा।
वहीं बीजेपी भी अपने उम्मीदवार को लेकर मंथन में जुटी है। पार्टी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के समीकरणों को साधने की कोशिश में है, ताकि राज्यसभा में अपनी रणनीतिक मजबूती सुनिश्चित की जा सके।
आगे क्या?
16 मार्च को होने वाले मतदान से पहले नामों की औपचारिक घोषणा किसी भी समय हो सकती है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म होता जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस किस चेहरे पर भरोसा जताती है और राज्यसभा के जरिए किसे राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका मिलती है।
