पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंचती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी 10 साल बाद कोलकाता में बड़ी चुनावी रैलियां करने जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और गर्म होने की उम्मीद है। उनका यह दौरा कांग्रेस के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर तब जब राज्य में पार्टी अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।
23 अप्रैल को प्रस्तावित इन जनसभाओं को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। 29 अप्रैल को कोलकाता और आसपास के जिलों में दूसरे चरण का मतदान होना है, ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इससे पहले 14 अप्रैल को राहुल गांधी उत्तर दिनाजपुर के रायगंज, मालदा के चांचल और मुर्शिदाबाद के समशेरगंज में जनसभाएं कर चुके हैं। इन सभाओं में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसे कांग्रेस अपने पक्ष में माहौल बनने के संकेत के तौर पर देख रही है।
अपने भाषणों में राहुल गांधी ने Bharatiya Janata Party, Rashtriya Swayamsevak Sangh और All India Trinamool Congress पर तीखा हमला बोला। उन्होंने Mamata Banerjee सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में बेरोज़गारी बढ़ रही है, उद्योग बंद हो रहे हैं और “सिंडिकेट राज” के कारण आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस भाजपा को रोकने में सक्षम नहीं है और कांग्रेस ही एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आ सकती है। उन्होंने शारदा चिटफंड, कोयला और भर्ती घोटालों का मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार को घेरा और कहा कि इन मामलों में आम जनता को नुकसान उठाना पड़ा है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला इस बार बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां All India Trinamool Congress, Bharatiya Janata Party और कांग्रेस के बीच कई सीटों पर त्रिकोणीय टक्कर देखने को मिल रही है। ऐसे में राहुल गांधी की कोलकाता में एंट्री से यह मुकाबला और भी रोमांचक हो सकता है।
अब नजरें 23 अप्रैल की रैलियों पर टिकी हैं, जो यह तय कर सकती हैं कि कांग्रेस बंगाल की राजनीति में कितनी मजबूती से वापसी कर पाती है।
