असम में 40 लाख महिलाओं के खातों में ₹9,000 ट्रांसफर: चुनाव से पहले ‘बिहार पैटर्न’ की चर्चा तेज

गुवाहाटी/नई दिल्ली, 10 मार्च — असम की राजनीति में आज उस समय हलचल तेज हो गई जब राज्य सरकार ने करीब 40 लाख महिलाओं के बैंक खातों में ₹9,000 की राशि ट्रांसफर कर दी। इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष का आरोप है कि यह चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है, जबकि सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की योजना बता रही है।

राज्य सरकार की ओर से यह राशि सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में भेजी गई है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह पहले से घोषित कल्याणकारी योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को वित्तीय सहायता देना है।

हालांकि विपक्षी दलों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस समय यह पैसा ट्रांसफर किया गया है, उसी समय देश में चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं और जल्द ही चुनाव आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में विपक्ष का आरोप है कि सरकार मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सरकारी योजनाओं का इस्तेमाल कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव से पहले सीधे खातों में नकद सहायता पहुंचाने की रणनीति नई नहीं है। इससे पहले बिहार की राजनीति में भी इसी तरह की योजनाओं को लेकर “बिहार पैटर्न” की चर्चा होती रही है, जहां सामाजिक और आर्थिक योजनाओं के जरिए बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की गई थी।

इसी बीच राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चुनाव आयोग जल्द ही आगामी चुनावों की तारीखों की घोषणा कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो आचार संहिता लागू होने से पहले इस तरह के बड़े वित्तीय ट्रांसफर को लेकर और ज्यादा राजनीतिक विवाद देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल असम में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए राहत साबित होती है या फिर चुनावी राजनीति का नया मुद्दा बनकर उभरती है

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