असम/नई दिल्ली:असम की राजनीति में एक बार फिर जोरहाट सीट को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने संकेत दिया है कि वह जोरहाट से चुनाव लड़ने के बजाय किसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ना पसंद करेंगे। उनके इस बयान के बाद विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।
दरअसल, जोरहाट सीट से कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi की जीत ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया था। पिछले लोकसभा चुनाव में गौरव गोगोई ने जोरहाट से करीब 1.5 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि चुनाव से पहले भाजपा नेताओं ने उन्हें खुली चुनौती दी थी कि वे इस सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं।
चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा और उनके कई मंत्रियों ने करीब चार सप्ताह तक जोरहाट में लगातार चुनाव प्रचार किया था। इसके बावजूद गौरव गोगोई ने भारी मतों से जीत हासिल की, जिसने इस सीट को राजनीतिक रूप से काफी चर्चित बना दिया।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि भाजपा के एक मंत्री ने प्रचार के दौरान यहां तक कह दिया था कि यदि गौरव गोगोई चुनाव जीत जाते हैं तो वह राजनीति छोड़ देंगे। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद इस बयान को लेकर भी विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधा।
हाल ही में हिमांता बिस्वा शर्मा ने कहा कि वह जोरहाट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन अब वह किसी “सुरक्षित सीट” से चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं। उनके इस बयान को विपक्षी दलों ने गौरव गोगोई की बढ़ती लोकप्रियता से जोड़कर देखा है।
विश्लेषकों का मानना है कि जोरहाट सीट पर पिछले चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत ने राज्य की राजनीति में समीकरण बदले हैं। हालांकि भाजपा का दावा है कि राज्य में उसकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत है और आगामी चुनावों में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि जोरहाट की जनता ने पिछले चुनाव में अपना रुख साफ कर दिया है और पार्टी भविष्य में भी इस जनसमर्थन को बरकरार रखने की कोशिश करेगी।
असम की राजनीति में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगामी चुनावों में मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा किस सीट से चुनाव लड़ते हैं और जोरहाट की सीट पर राजनीतिक मुकाबला किस दिशा में जाता है
