असम की राजनीति में इस समय सबसे चर्चित नामों में से एक हैं Gaurav Gogoi। तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके गौरव गोगोई अब पहली बार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने जा रहे हैं, जहां उनकी उम्मीदवारी ने सियासी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
Jorhat से चुनाव लड़ने का उनका फैसला न सिर्फ उनके राजनीतिक करियर का नया अध्याय है, बल्कि Indian National Congress के लिए भी एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
लोकसभा में बड़ी जीत से बढ़ा कद
गौरव गोगोई इससे पहले उस समय सुर्खियों में आए जब Bharatiya Janata Party ने उन्हें हिंदू बहुल सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। उन्होंने न केवल चुनौती स्वीकार की, बल्कि लगभग 1.5 लाख वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक मजबूती साबित की।
इस जीत ने उन्हें असम कांग्रेस के सबसे मजबूत चेहरों में शामिल कर दिया।
विधानसभा चुनाव: नई जंग, नई चुनौतियां
अब जब वे विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं, तो मुकाबला और भी कठिन नजर आ रहा है। बीजेपी ने इस चुनाव पर पूरी ताकत झोंक दी है और लगातार कांग्रेस नेताओं को अपने पाले में शामिल कर रही है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भले ही सार्वजनिक तौर पर पार्टी आत्मविश्वास दिखा रही हो, लेकिन अंदरूनी सर्वे बीजेपी की चिंता बढ़ा रहे हैं। यही वजह मानी जा रही है कि वह विपक्षी नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति अपना रही है।
‘वन मैन आर्मी’ की छवि
ऐसे माहौल में गौरव गोगोई खुद को एक ‘योद्धा’ की तरह पेश कर रहे हैं। चौतरफा राजनीतिक हमलों के बावजूद वे लगातार मैदान में डटे हुए हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि मौजूदा समय में गोगोई ही असम में पार्टी की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।
असम की राजनीति का केंद्र बिंदु
Assam की राजनीति में यह चुनाव भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
गौरव गोगोई की यह लड़ाई अब राजनीतिक से ज्यादा व्यक्तिगत बन चुकी है—जहां एक तरफ सत्ता पक्ष की पूरी ताकत है, तो दूसरी तरफ एक नेता की छवि, संघर्ष और संगठन को बचाने की चुनौती।
आने वाले चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि क्या गौरव गोगोई अपनी ‘योद्धा’ वाली छवि को जीत में बदल पाते हैं या नहीं। लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने उन्हें असम की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
