नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा और लोकसभा सचिवालय को औपचारिक नोटिस सौंप दिया है। शुक्रवार को दिए गए इस नोटिस में 10 पन्नों से अधिक का विस्तृत विवरण शामिल है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए सात प्रमुख कारण बताए गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से दिए गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। इसमें विशेष रूप से बिहार की SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण कई लोगों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हुए हैं और मतदाताओं के अधिकारों के हनन की आशंका पैदा हुई है।
नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली कुछ राजनीतिक दलों के प्रति पक्षपातपूर्ण रही है। तृणमूल कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में कई महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख किया है और कहा है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता लोकतंत्र की मूल आधारशिला है।
14 दिनों में होगा प्रारंभिक निर्णय
संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, अब लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के पास इस नोटिस पर विचार करने के लिए 14 दिनों का समय है। यदि इस अवधि के दौरान तृणमूल कांग्रेस अपना आवेदन वापस नहीं लेती और नोटिस प्रारंभिक रूप से स्वीकार्य पाया जाता है, तो आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति संयुक्त रूप से एक जांच समिति का गठन करेंगे। यह समिति लगाए गए आरोपों की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट देगी कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का मामला बनता है या नहीं।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की संसदीय प्रक्रिया तय की जाएगी और उसी के बाद यह स्पष्ट होगा कि महाभियोग प्रस्ताव संसद में आगे बढ़ेगा या नहीं।
