पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होती नजर आ रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 14 अप्रैल से राज्य में अपने चुनावी अभियान का आगाज़ करने जा रहे हैं। इस बार उनका दौरा खास माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अकेले दम पर सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
राहुल गांधी अपने अभियान की शुरुआत मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अहम इलाकों से करेंगे। ये क्षेत्र पारंपरिक रूप से कांग्रेस के प्रभाव वाले माने जाते रहे हैं, ऐसे में पार्टी यहां से अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी। उनके दौरे का मकसद न सिर्फ संगठन को मजबूत करना है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना भी है।
इसी कड़ी में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी भी 17 अप्रैल को पश्चिम बंगाल पहुंचेंगी। प्रियंका का फोकस जनसभाओं और रोड शो के जरिए सीधे मतदाताओं से जुड़ने पर रहेगा। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे राज्य के दलित बहुल इलाकों में प्रचार अभियान चलाकर सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस इस बार राज्य में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के अलावा खुद को एक मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि बंगाल की जनता को तीसरे विकल्प की जरूरत है, और वह इस खाली जगह को भर सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी का निशाना सिर्फ बीजेपी तक सीमित रहेगा या फिर वे तृणमूल कांग्रेस पर भी उतनी ही आक्रामकता दिखाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस किस तरह अपनी राजनीतिक रणनीति तय करती है और क्या वह बंगाल की राजनीति में अपनी खोई हुई पकड़ दोबारा हासिल कर पाती है।
