लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश प्रभारी के पद पर बड़ा बदलाव करते हुए अविनाश पाण्डेय की जगह पूर्व दिल्ली सरकार के मंत्री और दलित चेहरे राजेन्द्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह फैसला प्रदेश में दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। लंबे समय से उत्तर प्रदेश में कमजोर पड़ चुके जनाधार को मजबूत करने के लिए पार्टी सामाजिक समीकरणों पर विशेष ध्यान दे रही है।
हालांकि, प्रदेश प्रभारी के बदलाव के बावजूद उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दलित प्रभारी बनाए जाने के बाद अब किसी दलित नेता के प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना कम हो गई है। ऐसे में यदि पार्टी ओबीसी समाज से किसी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाती है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि संगठन की कमान किसे सौंपी जाती है।
प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय अजय लल्लू को ओडिशा प्रभारी पद से हटाए जाने के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा विधायक वीरेंद्र चौधरी भी प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं सांसद राकेश राठौर भी संगठन की कमान संभालने के इच्छुक बताए जा रहे हैं, हालांकि वह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए थे।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी चल रही है और कई राष्ट्रीय सचिवों को भी बदला जा सकता है। ऐसे में आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का यह संगठनात्मक पुनर्गठन पार्टी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
