असम की राजनीति में इस बार सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि पहचान और स्वाभिमान की बहस भी तेज हो गई है। गुवाहाटी सेंट्रल सीट से बीजेपी द्वारा विजय गुप्ता को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या असम एक “बाहरी” चेहरे को न सिर्फ विधायक, बल्कि संभावित डिप्टी सीएम के रूप में स्वीकार करेगा।
विजय गुप्ता को पार्टी नेतृत्व का करीबी माना जा रहा है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो उन्हें डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, उनका “बाहरी” होना विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है।
वहीं विपक्ष ने इस सीट से कुंकी चौधरी को मैदान में उतारा है—एक युवा, शिक्षित और असमिया पहचान से जुड़ी उम्मीदवार। लंदन से पढ़ाई कर लौटने वाली कुंकी चौधरी को स्थानीय संस्कृति और अस्मिता की प्रतिनिधि के रूप में पेश किया जा रहा है।
स्वाभिमान बनाम विकास का नैरेटिव
चुनाव अब दो अलग-अलग नैरेटिव के बीच फंसता दिख रहा है। एक तरफ बीजेपी विकास, नेतृत्व और संगठन की ताकत को मुद्दा बना रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस चुनाव को “असमिया स्वाभिमान” बनाम “बाहरी प्रभाव” की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में पहचान की राजनीति कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार यह बहस और भी तीखी हो गई है क्योंकि मामला सीधे सत्ता के शीर्ष पद—डिप्टी सीएम—से जुड़ता नजर आ रहा है।
