हल्द्वानी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली को उत्तराखंड की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। रामलीला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ने कुमाऊं क्षेत्र में अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने का स्पष्ट संदेश दिया है।
पार्टी पहले ही इस सभा को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बता चुकी थी। खरगे की मौजूदगी में कांग्रेस ने न सिर्फ अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश की, बल्कि आने वाले चुनाव में किन मुद्दों को केंद्र में रखा जाएगा, उसका भी संकेत दिया।
युवाओं के मुद्दे पर कांग्रेस का फोकस
हल्द्वानी रैली में कांग्रेस के प्रमुख एजेंडे में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और छात्र आंदोलनों जैसे मुद्दे शामिल रहे। पार्टी इन मुद्दों के जरिए प्रदेश के युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का कहना है कि रोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया युवाओं के सबसे अहम सवाल हैं। पार्टी लगातार पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाती रही है।
ऐसे में खरगे की हल्द्वानी रैली के जरिए कांग्रेस ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को आगामी चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की है।
धामी सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने तैयार की जमीन
खरगे के दौरे से पहले ही उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरती रही है। पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं के सवालों को लेकर कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व लगातार सरकार पर निशाना साधता रहा है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर सवालों का अब तक संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है। पार्टी ने मंदिरों में चढ़ावे से जुड़े विवाद को भी राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाने की रणनीति बनाई है।
ऐसे में खरगे की रैली को कांग्रेस के उस अभियान की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके जरिए पार्टी 2027 से पहले भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल तैयार करना चाहती है।
क्या हल्द्वानी से शुरू हुआ 2027 का चुनावी संदेश?
हल्द्वानी की सभा को केवल एक सामान्य राजनीतिक जनसभा मानना कांग्रेस की रणनीति को सीमित करके देखने जैसा होगा। उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय हो चुकी हैं।
कांग्रेस रोजगार, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं और छात्र हितों के मुद्दों के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। वहीं भाजपा विकास, सुशासन और युवाओं के साथ सीधे संवाद को अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बना रही है।
ऐसे में खरगे की हल्द्वानी रैली को 2027 की चुनावी लड़ाई से पहले कांग्रेस की ओर से दिया गया एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
29 विधानसभा सीटों वाले कुमाऊं पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस के लिए कुमाऊं की राजनीतिक जमीन बेहद महत्वपूर्ण है। कुमाऊं मंडल में विधानसभा की 29 सीटें हैं और आगामी चुनाव के लिहाज से यह पूरा क्षेत्र निर्णायक महत्व रखता है।
यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी सभा के लिए हल्द्वानी को चुना। पार्टी की कोशिश सीधे कुमाऊं के मतदाताओं के साथ-साथ अपने कार्यकर्ताओं और संगठन को भी चुनावी तैयारियों के लिए सक्रिय करने की है।
हल्द्वानी लंबे समय से कुमाऊं की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां खरगे की मौजूदगी कांग्रेस के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कार्यकर्ताओं में चुनावी ऊर्जा भरने की कोशिश
खरगे की रैली का एक बड़ा उद्देश्य कांग्रेस के जमीनी संगठन में नई ऊर्जा पैदा करना भी माना जा रहा है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को लगातार सक्रिय रखने की कवायद शुरू कर दी है।
हल्द्वानी में बड़ी सभा के जरिए पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि 2027 की लड़ाई के लिए तैयारियां अभी से शुरू करनी होंगी।
कांग्रेस के सामने चुनौती केवल भाजपा सरकार को घेरने की नहीं, बल्कि अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की भी है। ऐसे में खरगे की रैली को इसी व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
