देहरादून/दिल्ली। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई वरिष्ठ नेताओं ने बगावत का रास्ता अपनाते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का दामन थाम लिया है। यह घटनाक्रम आगामी चुनावों से पहले राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने के संकेत दे रहा है।
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा से जुड़े छह प्रमुख चेहरों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इनमें पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, भीमलाल आर्य और नारायण पाल शामिल हैं। इसके अलावा लाखन नेगी, जो भीमताल से निर्दलीय प्रत्याशी रह चुके हैं, रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल और मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने भी कांग्रेस में शामिल होकर सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को “ट्रेलर” करार देते हुए दावा किया है कि आने वाले समय में भाजपा के और भी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य में मौजूदा सरकार के “कुशासन” से नेता और जनता दोनों ही असंतुष्ट हैं, जिसके चलते यह असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है।
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उत्तराखंड में बदलाव की लहर शुरू हो चुकी है और आगामी चुनाव में पार्टी मजबूती के साथ सरकार बनाने की स्थिति में होगी। वहीं, भाजपा की ओर से इस घटनाक्रम पर फिलहाल कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी सूत्र इसे “सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया” बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। उत्तराखंड की राजनीति में यह घटनाक्रम एक नए समीकरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां दल-बदल और आंतरिक असंतोष अहम भूमिका निभा सकते हैं।
