पुणे के AISSMS कॉलेज ग्राउंड में शनिवार को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र और छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्राओं से महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता, पितृसत्ता और उनकी पहचान से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से संवाद किया।
राहुल गांधी ने कहा कि किसी महिला की पहचान उसके पिता, पति या बेटे से नहीं होती, बल्कि उसकी अपनी स्वतंत्र पहचान होती है। उन्होंने महिलाओं को सामाजिक और पारिवारिक बंधनों से बाहर निकलकर अपने फैसले खुद लेने की आजादी देने की बात कही।
‘महिलाओं को अपनी पहचान खुद तय करने का अधिकार’
राहुल गांधी ने कहा कि बेटी, पत्नी या मां होना किसी महिला की एकमात्र पहचान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि महिलाओं की पहचान किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते से नहीं, बल्कि उनकी अपनी क्षमताओं, सपनों और फैसलों से होनी चाहिए।
मनुस्मृति का संदर्भ देते हुए राहुल गांधी ने महिलाओं को पिता, पति और बेटे से जोड़कर देखने वाली सोच की आलोचना की और इसे शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वतंत्र हैं और उन्हें अपनी जिंदगी के फैसले स्वयं लेने का अधिकार होना चाहिए।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप
राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को तीन स्तरों पर समझाया। उन्होंने कहा कि पहला रूप जन्म से पहले या जन्म लेते ही होने वाला भेदभाव और हत्या है, दूसरा शारीरिक अत्याचार और तीसरा आर्थिक बंदिशों के जरिए महिलाओं को निर्भर बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
‘पिंजरा तोड़ दो’
छात्राओं से संवाद करते हुए राहुल गांधी ने उन्हें डर से बाहर निकलने और अपनी आवाज बुलंद करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने सपनों के लिए आगे बढ़ना चाहिए और किसी भी तरह की सामाजिक बंदिश को अपनी पहचान पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी महिलाएं हैं। उन्होंने देश की करोड़ों महिलाओं को भारत की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं युवा, संवेदनशील, करुणामयी और भविष्य को लेकर दूरदर्शी हैं।
युवाओं के बीच सीधा संवाद
पुणे में राहुल गांधी का छात्राओं के साथ यह संवाद महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता के सवालों को केंद्र में लेकर हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी रही और राहुल गांधी ने छात्रों के साथ उनके भविष्य, अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका को लेकर बातचीत की।
अपने संबोधन में उन्होंने छात्राओं से स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी पहचान किसी रिश्ते या सामाजिक भूमिका तक सीमित नहीं है। उनकी अपनी पहचान, अपने सपने और अपनी आवाज है। हैं हमारी महिलाएं’
