लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह सीटों के मामले में पिछली बार की तुलना में कमजोर समझौते के लिए तैयार नहीं है।
2017 में कांग्रेस को मिली थीं 105 सीटें
2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 298 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था।अब कांग्रेस इसी पुराने आंकड़े को आधार बनाकर आगामी चुनाव में सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग कर रही है। पार्टी का तर्क है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां 2017 से अलग हैं और सीटों का बंटवारा उसी हिसाब से होना चाहिए।
2024 के लोकसभा नतीजों ने बढ़ाया कांग्रेस का आत्मविश्वास
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ही 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अपने प्रदर्शन को लेकर उत्साहित हैं।2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि 2024 में पार्टी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की।दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने 2019 में 5 लोकसभा सीटें जीती थीं और 2024 में उसका आंकड़ा बढ़कर 37 सीटों तक पहुंच गया। इन नतीजों के बाद दोनों दल उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं। यही वजह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन और सीटों का गणित बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस ने बराबर हिस्सेदारी की मांग रखी
यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पार्टी सम्मानजनक सीटों पर ही समझौता करेगी। कांग्रेस की ओर से समाजवादी पार्टी के सामने बराबर हिस्सेदारी की मांग रखे जाने की बात कही जा रही है।कांग्रेस का तर्क है कि वह राष्ट्रीय पार्टी है और सीट बंटवारे में उसकी राजनीतिक हैसियत के अनुरूप सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होने की बात कही जा रही है।
अजय राय भी दे चुके हैं संकेत
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि पार्टी सभी सीटों पर अपनी तैयारी कर रही है और गठबंधन होने की स्थिति में सम्मानजनक सीटों पर ही समझौता किया जाएगा। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस इस बार सीट बंटवारे में पिछली बार से कम हिस्सेदारी स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
‘80 में से 17’ वाला लोकसभा फॉर्मूला विधानसभा में नहीं चलेगा?
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी सीट बंटवारे को लेकर सख्त रुख का संकेत देते हुए कहा है कि “सपा हमारी सीटें तय नहीं कर सकती…” साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा चुनाव में लागू हुआ 80 में से 17 सीटों वाला फॉर्मूला विधानसभा चुनाव में स्वीकार्य नहीं होगा।यानी कांग्रेस विधानसभा चुनाव में अपनी संगठनात्मक मौजूदगी और 2024 के लोकसभा प्रदर्शन को आधार बनाकर बड़ी हिस्सेदारी चाहती है।
सीतापुर सांसद ने 2017 का हवाला दिया
सीतापुर से कांग्रेस सांसद ने भी सीट बंटवारे पर पार्टी का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि 2017 में जब समाजवादी पार्टी सरकार में थी, तब कांग्रेस ने गठबंधन में 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उनका तर्क है कि आज परिस्थितियां अलग हैं और समाजवादी पार्टी विपक्ष में है, इसलिए सीटों का बंटवारा भी उसी राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
कांग्रेस का संदेश साफ
कुल मिलाकर कांग्रेस ने गठबंधन को लेकर अपना रुख काफी स्पष्ट कर दिया है। पार्टी 2017 में मिली 105 सीटों के आंकड़े को अपनी न्यूनतम राजनीतिक आधाररेखा के तौर पर देख रही है और इससे कम सीटों पर समझौते को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
